The smart Trick of Subconscious Mind Power That Nobody is Discussing




ऊपर से लोगों ने सिर झुकाकर कहा, "रात में हम यहां कुछ ढूंढ़ने निकले हैं।"

इधर जब वह माली सैयद से भी निबटन चुका तो मौलवी की ओर मुड़ा और कहा, "ऐ मौलवी, ! तू सारे धूर्तों का सरदार है। खुदा तुझे लुंजा करे। क्या तेरा यह फतवा है कि किसी के बाग में घुस आये और आज्ञा भी न ले?

तुझको मालूम नहीं कि जिसदिन मैं पैदा हुआ था, अन्याय की जड़ उसी दिन खोद दी गयी थी। प्रकाश के सामने अंधेरा कब ठहर सकता है?"

बादशाह ने कहा, "अपने साथी की प्रशंसा में अति न कर और दूसरे की प्रशंसा के सहारे अपनी प्रशंसा न कर, क्योंकि यदि परीक्षा के लिए इसे मैं तेरे सामने बुलाऊं तो तुझको लज्जित होना पड़ेगा।"

इस काफिर पहलवान ने जब यह उपदेश सुना तो उसे ज्ञान हो गया। कहा, "हाय! अफसोस, मैं अबतक जुल्म के बीज बो रहा था। मैं तो तुझे कुद और समझता था। लेकिन तू तो खुदा का अन्दाज लगाने की न सिर्फ तराजू है, बल्कि उस तराजू की डंडी है। मैं उस ईश्वरीय ज्योति का दास हूं, जिससे तेरा जीवन-दीप प्रकाशित हो रहा है। इसलिए मुझे अपने मजहब का कलमा सिखा, क्योंकि तेरा पद मुझसे बहुत ऊंचा है।"

[ऐ मनुष्य! तो जो ईश्वर की प्रशंसा और स्तुति करता है, तेरी दशा भी इस चरवाहे से अच्छी नहीं है। मू महा अधर्मी और संसार में लिप्त है। तेरे कर्म और वचन भी निकृष्ट हैं। यह केवल उस दयालु परामात्मा की कृपा है कि वह तेरे अपवित्र उपहार को भी स्वीकार कर लेता है।]१

[जब किसी को तुम्हारे काम से हमदर्दी नहीं है तो अपना काम स्वयं ही करना चाहिए। बहुत से लोग मनष्य-भक्षक हैं। तुम उनके अभिवादन करने से (अर्थात् उनकी नम्रता के भम्र में पड़कर) लाभ की

अगले दिन प्रात:काल वह परीक्षा के लिए दरवाजे पर खड़ा हो गया। दासी ने भोजन लाकर सामने रखा। एक बासी रोटी का टुकड़ा, जो बच रहा था, नीचे गिर पड़ा। मुर्गा तो ताक में लगा हुआ था ही, तुरन्त उड़ा ले गया। कुत्ते ने शिकायत की, "तू कच्चे गेहूं भी चुग सकता है। मैं दाना नहीं चुग सकता। ऐ दोस्त!

हजरत मूसा ने कहा, "जा, अब अपने को भी बेचकर नुकासन से बच जा। तू तो इस काम में खूब चालाक हो गया है। अब की बार website भी अपनी हानि दूसरी लोगों के सिर डाल दे और अपनी थैलियों को दौलत से भर ले। भवितव्यता तुझे इस समय शीशे में दिखाई दे रही है, मैं उसको पहले ही ईंट में देख चुका था।"

एक आदमी ने अपनी स्त्री को मार डाला। परिचितों ने कहा, "अरे दुष्ट! तूने अपनी स्त्री को मार डाला और उसकी सेवा को भूल गया। हाय-हाय, अभागे!

चोबदारों ने ऐसा ही किया। उसको अशर्फियां से भरी हुई मशक दे दी और दजला पर ले गये। जब वह अरब नौका में सवार हुआ और दजला नदी को देखा तो लज्जा के कारण उसका सिर झुक गया, फिर सिर झुक गया, फिर सिर झुकाकर कहने लगा कि दाता की देन भी निराली है और इससे भी बढ़कर ताज्जुब की बात यह है कि उसने मेरे कड़वे पानी तक को कबूल कर लिया।

परेशान है नौकरी और दुकान केलिए...मुसलिमो

तुर्कं ने कहा, "अगर मैं इस घटना का जरा भी संकेत कर देता ता उसी समय तेरा पित्त हो जाता और डर के मारे तेरी आधी जान निकल जाती। उस समय न तुझमें

मौलवी ने कहा, "तुझे निस्सन्देह मारने का अधिकार है। कोई कसर उठा न रखा। जो अपनों से अलग हो जाये, उसकी यही सजा है। इतना ही नहीं, बल्कि इससे भी सौगुना दण्ड मिलना चाहिए। मैं अपने निजी बचाव के लिए अपने साथियों से क्यों अलग हुआ?"

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *